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कहीं के नहीं रहे पूर्व DGP गुप्तेश्वर पांडेय, अब बीजेपी ने भी नहीं दिया टिकट, बक्सर में चुनावी कार्यालय पर लटका ताला

बक्सर : सियासी महत्वाकांक्षा के लिए डीजीपी पद से वीआरएस लेने वाले गुप्तेश्वर पांडेय़ कहीं के नहीं रहे. पहले जेडीयू ने टिकट देने के इंकार कर दिया था. अब बीजेपी ने भी गले लगाने से साफ मना कर दिया. बक्सर से बीजेपी ने दूसरे उम्मीदवार के नाम का एलान कर दिया है. बक्सर शहर में चल रहे गुप्तेश्वर पांडेय के दफ्तर में आज बड़ा ताला लटक गया.

सियासत में फेल हुए गुप्तेश्वर पांडेय

दरअसल बिहार के पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने पिछले महीने आनन फानन में वीआरएस ले लिया था. इरादा साफ था-सियासी पारी खेलना. लिहाजा कुछ दिन पहले बकायदा जेडीयू की सदस्यता ग्रहण कर ली. गुप्तेश्वर पांडेय के लोगों ने बक्सर में अपना चुनावी कार्यालय भी खोल लिया था. प्रचार शुरू हो गया था कि पांडेय जी ही बक्सर से उम्मीदवार होंगे.

पांच दिन पहले ही जेडीयू ने इंकार कर दिया था

जेडीयू सूत्रों की मानें तो पांच दिन पहले ही जेडीयू ने उन्हें बता दिया था कि टिकट नहीं मिलने वाला. सूत्रों के मुताबिक गुप्तेश्वर पांडेय रात में सीएम आवास पहुंचे थे. वहां उन्हें साफ साफ कह दिया गया कि बक्सर से टिकट नहीं मिलने वाला. पांडेय जी ने तब बेगूसराय से टिकट देने की मांग रख दी थी. इसके बाद नीतीश कुमार नाराज हो गये थे. पांडेय जी बैरंग वापस लौटे थे.

 

काम नहीं आया बीजेपी में जुगाड़

बीजेपी के एक नेता के मुताबिक गुप्तेश्वर पांडेय ने जेडीयू के इंकार के बाद बीजेपी में जुगाड़ लगाना शुरू कर दिया था. उन्होंने बीजेपी को मैनेज करने की पूरी कोशिश की. पटना से लेकर दिल्ली तक के नेताओं को पकड़ा गया. लेकिन बीजेपी मानने को तैयार नहीं हुई. बक्सर से बीजेपी ने आज अपने उम्मीदवार के नाम का एलान कर दिया. परशुराम चतुर्वेदी को बीजेपी ने टिकट दिया था.

बक्सर से मिल रही खबर के मुताबिक आज शाम गुप्तेश्वर पांडेय के चुनाव कार्यालय पर फाइनली ताला लगा दिया गया. उनके समर्थक निराश होकर लौट गये हैं.

दूसरी बार फेल हुए गुप्तेश्वर पांडेय
गुप्तेश्वर पांडेय दूसरी बार सियासत में फेल हुए. इससे पहले 2009 में उन्होंने नौकरी से वीआरएस ले लिया था. तब वे बक्सर संसदीय सीट से बीजेपी के टिकट के दावेदार थे. लेकिन बीजेपी ने टिकट नहीं दिया. जुगाड़ के सहारे गुप्तेश्वर पांडेय फिर से नौकरी में लौटे और डीजीपी की कुर्सी तक पहुंच गये. लेकिन इस दफे भी किस्मत ने साथ नहीं दिया.